Jāyasī kā kāvya

Передняя обложка
Iṇḍiyana Yūnivarsiṭī Presa ke lie Himālaya Pākeṭa Buksa, 1973 - Всего страниц: 168

Результаты поиска по книге

Отзывы - Написать отзыв

Не удалось найти ни одного отзыва.

Содержание

Раздел 1
6
Раздел 2
9
Раздел 3
30

Не показаны другие разделы: 7

Часто встречающиеся слова и выражения

अतः अतिरिक्त अधिक अन्य अपनी अपने अर्थ आदि इन इस प्रकार इसके इसमें इसी ईश्वर उनके उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसी उसे एक एवं कथा कबीर कर करता है करते करना करने कवि कवि ने कवियों कहा का वर्णन किन्तु किया है की ओर की है कुछ के कारण के रूप में के लिए केवल को कोई गया है चित्रण जब जा सकता है जाता है जाती जायसी ने जिस जीवन जो तक तथा तो था थे दिया दोनों द्वारा धर्म नहीं है नागमती नाम पद्मावत पर परमात्मा पृ० प्रतीकों प्रयोग प्रस्तुत प्राप्त प्रेम प्रेम का ब्रह्म भारतीय में भी यद्यपि यह या ये रत्नसेन राजा लिये वह वही विरह वे शब्द संस्कृति सब समन्वय साहित्य सूफ़ियों सूफ़ी से सौन्दर्य स्थान स्पष्ट हिन्दी के ही हुआ है हुई हुए हृदय है और है कि है किन्तु हैं हो हो जाता है होकर होता है होती होते होने

Библиографические данные